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Saturday, 4 April 2020

दर्द का रिश्ता - D for Dard ka rishta

दर्द का रिश्ता। 








ख़ुशी। .... 
ख़ुशी के लिए, हम क्यों मरते रहते हैं,
ख़ुशी के लिए - हम क्यों मरते रहते हैं,
दर्द। 
दर्द जब जरूरी है, 
उसका ही रिश्ता सच्चा रिश्ता होता है।
ख़ुशी के लिए, हम क्यों मरते रहते हैं,

माँ। 
माँ बनना है, एक सुखद अनुभूती है ,
गोद भरेगा तभी तो जीवन पूर्ण होगा,
आंगन में किलकारी , मकान तब घर होगा,
पति बाप बनेगा ,खानदान का नाम रौशन होगा ,
अपना खून होगा , अपना वंश आगे  बढ़ेगा,
सच। मगर दर्द। .... 
दर्द होगा तभी तो ये होगा,
तो दर्द - दर्द अपना होता है 
दर्द का रिश्ता ही सच्चा होता है 
दर्द है तभी ख़ुशी है। 
ख़ुशी के लिए, हम क्यों मरते रहते हैं,
वो तो ख़ुद आ जायेगा।
दर्द के बारे में सोचो।  
दर्द संजोगो। 
वही अपना है 
रिश्ता है। 
सच्चा रिश्ता। 


आदित्य सिन्हा
04.04 2020

Friday, 3 April 2020

चुंबन (C for Chumban) - Kiss

चुंबन

C for Chumban - Kiss



(Hug & Kiss always go together. So this one is continuation from where I left my poem from A - Aingan. Read this in continuation with Alingan to enjoy more. )

दैविक ज्योति लागयो,
रच्यो प्रेम ते डोर,
गुंजत ब्रह्म तरंग,
संग सुरभित लय मंद।  

मंद चल्यो मोहे हाथ,
मखमल स्पर्श समात, 
झुकल चेहरा तब उठ्यो,
जड्यो तयों मोहे नैन ,  

नैना संग नैन बतियाओ,
मोई बंधन बने जडन्त, 
उइ अंग संग अंग समायो,
पिघलो कामुक आह संग।  

आह संग  दउरत सांस, 
मोइ गर्दन हौले झुकाए,
उइ एड़ी पर तब चढ़्यो ,
पहुँचल तब जुदा होईल पंखुड़िया तक। 

पंखुड़िया जुदा तब मिल्यो,
जड्यो चुम्बन संग मीत,
उई आनन्द संग खिल्यो, 
परिपूर्ण अउर परितृप्त। 

परितृप्त दोउ भै तब शांत,
जड़ चेतन समाय इक संग,
एक चुंबन संग चिरकालिक,
सदैव हुए संग प्रफुल्लित। 


आदित्य सिन्हा
03.04.2020